राजनीतिक लाभ के लिए सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ते भाजपाई

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हल्द्वानी/ विगत 16 नवम्बर को हल्द्वानी के बनभूलपुरा थाना क्षेत्र के उजाला नगर में मंदिर के पास बछड़े का सिर मिलने की खबर फैली। खबर फैलते ही इसे साम्प्रदायिक रंग देते हुए, मुसलमानों के खिलाफ हंगामा करती भीड़ जुटने लगी। इस भीड़ के नारे ‘‘जय श्री राम’’, ‘‘हिंदुस्तान में रहना होगा, जय श्री राम कहना होगा’’, ‘‘वंदे मातरम’’ आदि थे। संघ-भाजपा से जुड़े लम्पटों की भीड़ ने उजाला नगर के पास शमा रेस्टोरेंट में तोड़फोड़ की। सड़क में खड़े वाहनों पर पथराव किया। हल्द्वानी के पीलीकोठी क्षेत्र में मुस्लिम दुकानदारों पर हमले किये, दुकानों में तोड़फोड़ की। पुलिस ने बलप्रयोग कर लम्पटों की भीड़ को हटाया। सीसीटीवी फुटेज से पता चला कि बछड़े का सिर वहां कुत्ते लाये थे। ये किसी इंसान का काम नहीं था। इस बात का खुलासा हो जाने पर साम्प्रदायिक तनाव बढ़ाने की साजिश नाकाम हो गयी।
    
फोरेंसिक जांच में पता चला कि बछड़े का सिर किसी धारदार हथियार से अलग नहीं किया गया था और खोजबीन से यह भी पता चल गया कि नए जन्मे बछड़े को कुत्तों ने नोंचा था। यह स्पष्ट नहीं हो सका कि उसे कुत्तों ने ही मारा या बछड़ा मृत था जिसे कुत्तों ने नोंचा। 
    
इन तथ्यों से इतर सवाल है कि ‘‘जय श्री राम’’ का नारा लगाते हुए किसी पर भी हमला करने का दुस्साहस कहां से आता है? कानूनी प्रक्रिया या जांच का इंतजार क्यों नहीं किया जाता? यह भी साफ है कि हर जगह हिंसा हो या राजनीतिक कार्यक्रम इन नारों का प्रमुखता से संघ-भाजपा इस्तेमाल करती है। हिन्दू प्रतीकों का इस्तेमाल कर मुसलमानों पर हमला किया जाता है। अव्वल तो ये लम्पट संघ-भाजपा से जुड़े होते हैं या फिर इन्हें संरक्षण मिला होता है। यहां भी भाजपा-संघ से जुड़े नेता पहुंचे थे। पुलिस ने कुछ नामजद व 50 अज्ञात लोगों के नाम मुकदमा दर्ज किया। इसमें नामजद किये लोगों में विपिन पाण्डे को 20 नवम्बर को गिरफ्तार कर 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया। लेकिन 22 नवम्बर को ही वह जमानत पर छूट गया।
    
ज्ञात हो कि 2027 में उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव होने हैं। इसके लिए भाजपा के केंद्र से लेकर स्थानीय स्तर के नेता साम्प्रदायिक तनाव पैदा करने में राजनीतिक जीत देख रहे हैं। इस मामले में जेल से छूटने पर विपिन पाण्डे ने एक वीडियो में कहा कि ‘‘उसे जेल भिजवाने की साजिश की गई। पहले वह सोचता था पर अब वह पक्का कालाढूंगी विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ेगा। हिंदुत्व की रक्षा के लिए वह लगा रहेगा।’’ इससे साफ है कि बछड़े का सिर लाये कुत्ते के बजाय भाजपा नेताओं की साम्प्रदायिक तनाव और तोड़-फोड़ में मुख्य भूमिका है। और यह तोड़-फोड़ चुनाव में ‘‘धर्म रक्षक’’ बनकर जीत जाने के साम्प्रदायिक फार्मूले की वजह से है। दंगे और चुनावी सफलता जन संघ के जमाने से आरएसएस का फार्मूला रहा है। संघ-भाजपा की लम्पट वाहिनी जबरन घटनाओं को सांप्रदायिक रंग देने में लग जाती रही है।
    
संघ-भाजपा के साम्प्रदायिक वैमनस्य फैलाने के इन प्रयासों के विरोध में हल्द्वानी, काशीपुर एवं हरिद्वार में सामाजिक-राजनीतिक संगठनों ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन प्रेषित कर तोड़-फोड़, पत्थरबाजी और मारपीट करने वाले इन लम्पट तत्वों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की है। 
    
हल्द्वानी में 18 नवम्बर को मानव अधिकार रक्षा अभियान, प्रगतिशील महिला एकता केंद्र, उत्तराखंड सर्वोदय मंडल, परिवर्तनकामी छात्र संगठन, भाकपा (माले) एवं क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन इत्यादि से जुड़े लोगों के एक प्रतिनिधि मंडल ने सिटी मजिस्ट्रेट से मुलाकात कर इस संबंध में एक ज्ञापन राज्य के मुख्यमंत्री को प्रेषित किया।      
    
ज्ञापन में ऐसे लंपट संघी तत्वों के खुला घूमने को समाज के चैन-सुकून के लिये खतरनाक बताते हुये मांग की गई है कि इन लम्पटों को तत्काल गिरफ्तार किया जाये; तोड़-फोड़ में हुये नुकसान का पीड़ितों को मुआवजा दिया जाये एवं सड़कों पर घूम रहे आवारा पशुओं को अनिवार्य रूप से गौशाला अथवा पशुगृह में रखा जाये जिससे सड़क दुर्घटनाओं को कम किया जा सके। 
    
काशीपुर में 19 नवम्बर को इंकलाबी मज़दूर केंद्र, भीम आर्मी, क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन एवं कांग्रेस से जुड़े लोगों के एक प्रतिनिधि मंडल ने उप जिलाधिकारी से मुलाकात कर राज्य के मुख्यमंत्री को एक ज्ञापन प्रेषित किया।
    
इस ज्ञापन में कहा गया है कि ये लम्पट तत्व पुलिस के सामने भी धार्मिक नारे लगाते हुये बेखौफ होकर उत्पात मचा रहे थे; और पुलिस भी लाठीचार्ज कर ही इन पर काबू पा सकी। अतः इन्हें तत्काल गिरफ्तार किया जाये।
    
इसी तरह हरिद्वार में 20 नवम्बर को इंकलाबी मजदूर केंद्र, प्रगतिशील महिला एकता केंद्र, भेल मजदूर ट्रेड यूनियन एवं किर्बी श्रमिक कमेटी के एक प्रतिनिधि मंडल ने तहसीलदार से मुलाकात कर मुख्यमंत्री को एक ज्ञापन प्रेषित किया। 
    
अब इस मामले में कानूनी कार्यवाही न्यायिक प्रक्रिया में उलझने को अभिशप्त है। इंसाफ के बजाय चुनावी जोड़ गणित के हिसाब से अपराधी तय होंगे और छूटेंगे। इनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षा शहर को हिंसा, तोड़फोड़ में झोंकने से भी नहीं हिचकिचाती। इनके इस घिनौने चरित्र को जनता के सामने बेनकाब करने की जरूरत है। 
        -हल्द्वानी संवाददाता

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