मजदूर संघर्षों की लहर का नया केन्द्र- कानपुर

Published
Mon, 06/01/2026 - 15:50

उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात में मजदूरों के विरोध प्रदर्शन का सिलसिला एक के बाद एक फैक्टरी में जारी है। इसी क्रम में 16 मई को सचेंडी स्थित आटो पार्ट्स कम्पनी स्पन माइक्रो प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड में मजदूरों ने वेतन वृद्धि के लिए प्रदर्शन किया। 19 मई को किसान नगर हाईवे के पास स्थित भगवती फूड्स प्राइवेट लिमिटेड में मजदूर वेतन वृद्धि और अन्य मांगों के लिए फैक्टरी से बाहर निकल आये। भगवती प्रोडक्ट्स के पास ब्रितानिया बिस्किट की फ्रेंचाइजी है।
    
मजदूरों के प्रदर्शन की खबर मिलते ही श्रम विभाग और पुलिस के अधिकारी फैक्टरी पहुंच गये और तुरंत मजदूरों की मांगों को मानने की बात कही गयी। भगवती के मजदूरों के प्रदर्शन की खबर मिलते ही पास में स्थित के प्लास्टिक जो कि प्लास्टिक के केन और डिब्बे बनाती है, के मजदूर भी वेतन वृद्धि की मांग को लेकर सड़क पर आ गये। बाद में श्रम विभाग और पुलिस के अधिकारियों की मौजूदगी में भगवती फूड्स के मजदूरों का समझौता हुआ। इस समझौते के तहत आठ घंटे की ड्यूटी, वेतन की दरें क्रमशः 13,600 रु. (अकुशल), 15,080 रु. (अर्ध कुशल) और 16,800 रु. (कुशल) की गयीं। चार रविवार का अवकाश, ओवरटाइम का दुगुना, पी एफ 12 प्रतिशत काटना और बोनस देना आदि मांगें मानी गयीं।
    
भगवती फूड्स के बाद पारले की फ्रेंचाइजी श्री अम्बा जी फूड्स के मजदूर भी प्रदर्शन करने की बात करने लगे लेकिन तुरंत ही प्रबंधन ने आकर मजदूरों को रोका और उनकी मांगों को मानने का आश्वासन दिया।
    
वहीं दूसरी तरफ बिठूर में गोल्डी मसाले के मजदूर अपनी मांगों को लेकर फैक्टरी गेट पर आ गये। इनमें अधिकांश महिला मजदूर थीं। इन मजदूरों ने हाईवे जाम कर दिया। 3-4 घंटे की मशक्कत के बाद ही जाम खुल पाया जब उनकी मांगों को मानने का आश्वासन दिया गया।
    
कानपुर देहात में जहां एक तरफ पुलिस और श्रम विभाग के अधिकारी लगातार यह कोशिश कर रहे हैं कि मजदूरों के संघर्ष आगे न बढ़ें लेकिन मजदूर फिर भी सड़कों पर आ रहे हैं। मजदूर अपने हालातों से यह अच्छी तरह समझ चुके हैं कि बिना लड़े उनके हालात नहीं सुधरेंगे और पुलिस प्रशासन सोशल मीडिया को इन प्रदर्शनों के लिए जिम्मेदार ठहरा रहा है। अगर मर्ज का सही इलाज न किया जाए तो फिर मर्ज बढ़ता ही जाता है। 

इस तरह मानेसर-नोएडा से उठी मजदूरों की आवाज एक-एक कर सारे औद्योगिक केन्द्रों में फैलती जा रही है। मानेसर-नोएडा-फरीदाबाद- राजस्थान-पंजाब-उत्तराखण्ड होते हुए यह कानपुर पहुंच गयी है। संघर्षों का सिलसिला जारी है। एक जगह मजदूरों के संघर्षों की खबर शांत पड़ती है तो दूसरी जगह के मजदूर संघर्ष का झण्डा थाम लेते हैं।

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