खेल और खेला

Published
Mon, 03/16/2026 - 07:03
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पिछले दिनों प्रधानमंत्री मोदी द्वारा बताया गया कि पश्चिम बंगाल में भारत के राष्ट्रपति का अपमान किया गया। उन्होंने तल्ख शब्दों में राष्ट्रपति के कथित अपमान की निन्दा की। प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति के अपमान का आरोप पं. बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर लगाया। 
    
महामहिम राष्ट्रपति ने अपने अपमान के बारे में कोई बात नहीं की और ममता बनर्जी ने राष्ट्रपति का अपमान करने से साफ इंकार किया। और उल्टे मोदी जी पर आरोप लगाया कि वे राष्ट्रपति को राजनीति के दलदल में न धकेलें। प्रधानमंत्री कह रहे हैं कि राष्ट्रपति का अपमान हुआ। राष्ट्रपति कुछ कह नहीं रही हैं। ये मामला है क्या?
    
मामला यह है कि आने वाले समय में पं.बंगाल में विधानसभा के चुनाव होने हैं। भाजपा येन-केन प्रकारेण चुनाव जीतना चाहती है। और जैसा कि भाजपा चुनाव जीतने के लिए करती रही है कि वह हर संवैधानिक संस्था, केन्द्रीय एजेन्सियां (ईडी, सीबीआई, आईटी आदि) का इस्तेमाल विरोधी दल की सरकार को परेशान करने के लिए करती रही है। इस बार बारी राष्ट्रपति के पद की थी। 
    
हमारे देश की राष्ट्रपति आदिवासी ठहरीं। और आदिवासियों में भी वे संथाली ठहरीं। और पं.बंगाल में आदिवासियों और उनमें संथालियों के खूब सारे वोट ठहरे। इन वोटों को हासिल करने के लिए मोदी सरकार ने राष्ट्रपति का कार्यक्रम आदिवासी बहुल इलाके में करवाने की सोची। बस इसी बिन्दु से सारा खेल शुरू हो गया। राष्ट्रपति के पद को मोदी जी ने राजनीति का मोहरा बना दिया। 
    
‘तू डाल-डाल तो मैं पात-पात’ की तर्ज पर ममता बनर्जी ने मोदी जी के खेल को खराब कर दिया। पहले तो उन्होंने राष्ट्रपति का कार्यक्रम एक छोटी सी जगह में करवाया और वह भी उस पर जहां ज्यादा आदिवासी रहते नहीं हैं। और फिर राष्ट्रपति के कार्यक्रम में खुद नहीं गयीं। बस यहीं से राष्ट्रपति के अपमान की कहानी शुरू हुयी। भारत सरकार के औपनिवेशिक जमाने से चले आ रहे ‘प्रोटोकाल’ के तहत महामहिम के कार्यक्रम में स्वयं ममता बनर्जी को आना चाहिए था और महामहिम के स्वागत में भीड़ इकट्ठा करनी थी। ममता भांप गयी थीं और उन्होंने मोदी जी के साथ ‘खेला’ कर दिया। महामहिम के जरिये आदिवासी वोट पाने का खेल, ‘खेला’ में बदल गया। 
    
महामहिम भी जानती हैं कि उन्हें क्यों और किसलिए मोदी जी ने राष्ट्रपति बनवाया था। वे वही करती व कहती हैं जो मोदी सरकार उनसे कहती-करवाती है। कभी पूर्व उप राष्ट्रपति धनखड़ भी ऐसा ही करते थे। पर न जाने क्या हुआ वे मोदी साहब की आंखों से उतर गये और फिर उन्हें बेआबरू कर के उप राष्ट्रपति के पद से चलता कर दिया गया। ऐसे में कोई किसी तरह का जोखिम नहीं लेना चाहता है। 
    
महामहिम ने ममता बनर्जी के न आने पर ज्यादा कुछ नहीं कहा। बस इतना ही कहा ‘वे मेरी छोटी बहन हैं और शायद नाराज हैं। पर छोटी बहन ठहरी ‘खेला’ की एक्सपर्ट सो उन्होंने बड़ी बहन को चलाने वाले साहब का खेल बिगाड़ दिया। फिर साहब चिल्लाने लगे अपमान हो गया। अपमान हो गया। 

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