पत्र
परसाखेड़ा औद्योगिक क्षेत्र के मजदूरों की दुर्दशा
बरेली के परसा खेड़ा औद्योगिक क्षेत्र में स्थित एक इलेक्ट्रिकल फैक्टरी के मजदूरों से बातचीत करने पर पता चलता है कि मालिक मजदूरों के खिलाफ क्या-क्या तिकड़में करता है।
ऊष्मा और नमी
एक तरफ दस फुट ऊंची दीवार, और दूसरी तरफ इस्पात फैक्टरी और एक तरफ दलित मजदूर बस्ती। नीला आसमान अक्सर शाम को धूल के बादलों से रंग बदल लेता। फैक्टरियों से निकलने वाले सीवर और
केन्द्रीय ट्रेड यूनियनों के बारे में दो शब्द
सभी साथियों व पाठकों को लाल सलाम। साथियों मेरा नाम पूरन है। मैं गुड़गांव में रहता हूं। साथियो मैं बात कर रहा हूं आज के केन्द्रीय ट्रेड यूनियनों के बारे में। साथियो जब मैं
राष्ट्रीय सुरक्षा के बहाने अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला
उन्माद एक खतरनाक व नकारात्मक शब्द है। किसी भी प्रकार का (धार्मिक, नस्ल, राष्ट्र, जातीय) उन्माद देश समाज के लिए खतरनाक है। संघी/भाजपाई इस उन्माद को पूरे देश में फैलाने में
दुनिया में भयावह होती स्थिति
इजरायल द्वारा गाजा में 18 महीनों से जारी युद्ध में अभी तक 54,000 लोग मारे जा चुके हैं जिसमें अधिकांश संख्या में महिलाएं व बच्चे हैं। अब इजरायली शासक गाजा को मिटा डालने पर
घर बनाते बनाते
2 BHK 3 BHK के होर्डिंग सड़कों पर लगे हुए हैं। एक मुस्कुराता हुआ इंसानी जोडा और उनके साथ दो बच्चे खेलते हुए। ऐसा ही विज्ञापन होता है अखबारों में, मकान बेचने वाले पम्फलेट म
नियति
फैक्टरी में काम करने से पहले गंगादीन एक गैस प्लांट में लोडिंग अनलोडिंग का काम करते थे। भरे हुए गैस सिलेण्डरों को लाइन से उठाकर ट्रक में लोड करने का एक निश्चित समय होता था
रामा विजन के बहाने
पुरानी बात है, किच्छा में एक फैक्टरी होती थी ‘रामा विजन’, इस फैक्टरी में ब्लैक एण्ड व्हाइट पिक्चर ट्यूब बनती थी। ब्लैक एण्ड व्हाईट टेलीविजन ही उस समय चलन में थे। अभी रंगी
राष्ट्रीय
आलेख
भारत की पूंजीवादी राजनीति में योगेन्द्र यादव एक जानी-मानी शख्सियत हैं। वे खुद को समाजवादी कहते हैं तथा किशन पटनायक को अपना गुरू बताते हैं। केजरीवाल के साथ ‘अन्ना आंदोलन’
अमरीकी साम्राज्यवाद पराभव की ओर है। अभी वह दुनिया की सबसे बड़ी ताकत है लेकिन उसको चुनौती देने वाली और भी ताकतें उभर कर आयी हैं। यूक्रेन में रूस की विजय आसन्न है। यूक्रेन अ
अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।
भारत की शिक्षा व्यवस्था में एक अजीबोगरीब विरोधाभास नजर आता है। एक ओर उच्च शिक्षा में आई आई टी, एम्स और आई आई एम जैसे सरकारी संस्थान हैं जो क्रमशः इंजीनियरिंग, चिकित्सा और
उदारवादी या वाम-उदारवादी अपनी प्रकृति से ही पूंजीवादी समाज के मूल अंतर्विरोधों को देखने में असमर्थ होते हैं। इसीलिए वे इसकी आम गति को देखने में असमर्थ होते हैं। उनका निजी सम्पत्ति, पैसे, प्रतियोगिता, इत्यादि में दृढ़़ विश्वास होता है। इनके बिना वे किसी समाज की कल्पना नहीं कर पाते। और ठीक इसी कारण वे यह नहीं देख पाते कि भ्रष्टाचार निजी सम्पत्ति, पैसा और प्रतियोगिता का अनिवार्य परिणाम है। कि इस समाज में भ्रष्टाचार को कानूनी वैधता प्रदान की जा सकती है, उसे खत्म नहीं किया जा सकता।